सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development – CPD) कार्यक्रम
पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय कांकेर अपने शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन कर रहा है। यह कार्यक्रम शिक्षकों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक कौशलों के निरंतर उन्नयन पर केन्द्रित है, जिसमें नवाचारी शिक्षण विधियाँ, दक्षतामूलक शिक्षा (Competency-Based Education), डिजिटल साक्षरता, मूल्यांकन पद्धतियाँ तथा कक्षा-कक्ष शिक्षण में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के प्रभावी एकीकरण पर विशेष बल दिया जाता है। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की परिकल्पना के अनुरूप संचालित की जाती है। विद्यालय में समय-समय पर आंतरिक कार्यशालाओं, सहयोगात्मक अधिगम सत्रों, प्रदर्शन आधारित गतिविधियों तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षक अपने ज्ञान एवं शिक्षण कौशल का निरंतर विकास करते हैं।
विद्यालय में आयोजित आंतरिक CPD गतिविधियों के अतिरिक्त, विद्यालय के शिक्षकों ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय एवं अन्य KVS प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अभिमुखीकरण (Orientation) सत्रों तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से सहभागिता की है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को व्यावसायिक अधिगम, श्रेष्ठ शिक्षण प्रथाओं के आदान-प्रदान, विषयगत समृद्धि, नेतृत्व विकास तथा शिक्षा के उभरते हुए नवीन आयामों से परिचित होने का अवसर प्राप्त होता है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अर्जित ज्ञान एवं कौशल को शिक्षक अपने सहकर्मियों के साथ साझा करते हैं तथा उसे प्रभावी रूप से कक्षा-कक्ष शिक्षण में लागू करते हैं, जिससे विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास को निरंतर प्रोत्साहन मिलता है।
सतत व्यावसायिक विकास की इसी श्रृंखला के अंतर्गत पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय कांकेर के शिक्षकों ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन द्वारा आयोजित विभिन्न क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई। श्री राजेश कुमार ने संस्कृत विषय के मास्टर ट्रेनर कार्यशाला में सहभागिता की, जिससे उन्हें नवाचारी शिक्षण पद्धतियों एवं प्रभावी भाषा शिक्षण तकनीकों का गहन ज्ञान प्राप्त हुआ। इसी प्रकार, श्रीमती सुमन देवी, पीजीटी (इतिहास) ने ZIET, मुंबई द्वारा आयोजित “Transforming History Classroom through Inquiry-Based and Experiential Learning” विषयक कार्यशाला में भाग लिया। इस कार्यशाला से उन्हें विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण, जिज्ञासा-आधारित अधिगम (Inquiry-Based Learning) तथा अनुभवात्मक शिक्षण (Experiential Learning) की प्रभावी रणनीतियों का गहन ज्ञान प्राप्त हुआ, जिससे इतिहास विषय का शिक्षण अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण एवं प्रभावशाली बनाने में सहायता मिली। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अर्जित ज्ञान एवं कौशल का प्रभावी उपयोग कक्षा-कक्ष शिक्षण में किया जा रहा है, जो विद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा शिक्षकों के व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।



